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Aakash's Joke

Oct,19 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
What Is Love? Explain In Detail

Question : What is love and explain in details ?………………. (10 marks)
Answer:
BA Student’s Answer: Love is life.… (marks : 1/2 from 10)
Bcom Student’s Answer : Love is pain.… ( marks : 1/2 from 10)
Engineering Student’s Answer :
– Definition:A serious disorder of heart due to relationship between men & women that can cause death of 1 or both depending on the resistance associated– TYPES:1 sided & 2 sided– AGE:Usually occurs in teenages but nowdays can be found in any age– SYMPTOMS:TensionDaydreamingInsomniaPhone Addiction– DIAGNOSIS BY:DiaryPhotosMobile– TREATMENT:Anti-LOVE therapy by Father’s ShoeorMother’s Sandal……(marks 10 from 10) Excellent !
N.B :- Don’t ask engineering students , they can do any thing for 10 marks !

Oct,18 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Dewali is lightful

Holy is colourful.
Sun is powerful.
Dewali is lightful.

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Wishing you a very happy and prosperous Diwali

With Gleam of Diyas,
And the Echo of the Chants,
May Happiness and Contentment Fill Your life !
Wishing you a very happy and prosperous Diwali !!!

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Deepavali Delights

Deepavali is here, Deepavali is here
That grand festival of Lights
That ends evil after a protracted fight
When good with all its might
Leads us from darkness to Light.

Deepavali is here, Deepavali is here
That great festival of sound
When crackers and laughter abound
When crackers and sparklers light up the sky
When delighted children jump with joy.

Deepavali is here, Deepavali is here
That gorgeous festival of snacks and sweets
Where everyone enjoys a royal feast
When old and young with delight meet
With love and affection all hearts beat.

Diwali is here, Diwali is here
That gracious festival which celebrates victory
The ancient festival of myth and mystery
That is mentioned in both mythology and history
The festival that signals Triumph over Tragedy.

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Sonnet: Diwali

Today's the `Festival of Lights' all o'er;
A joyful day for minds and hearts and souls;
And people throng the Temples to offer,
Prayers, resolving to take better roles.

And most of them are richly clad and clean,
And eat such dainty foods and sweets with mirth;
Whilst noisy crackers burst, their lights are seen,
It seems to be a happy day on Earth!

But are there not hearts woe-filled, very sad?
Denied of laughter, smiles for days;
Today's the triumph of Good over bad;
But what about the wastage in much ways?
True joy is when you see someone else smile!
True charity gives joy in Heav'nly style. 

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Urge an energetic and happy Diwali

 As stratums of zillion lights prettify,
And echoes of triumph and din swarm,
Watching even a minute glisten perform,
Sparking bliss despite sad,
Urge an energetic and happy Diwali

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Happy Diwali

It's the "Festival of Lights" today,
It's again the day of Diwali,
It's time to dress up folks, 
It's time to adorn the thali.

It's the occasion to throng the temples,
Pray to the Gods and give them offerings,
It's an opportunity to entreat the deities,
To bless us all and rid us of sufferings.

It's the day to light the diyas,
Ignite the rockets and burst crackers,
But it's also the time to be safe,
From the fireworks and all the sparklers.

It's the season to pay a visit, 
To all our friends and relations,
To hand them over sweets and presents,
Diwali is our splendid chance.

But while you spend a time of joy,
Don't think it's merriment all the way,
Out there wait many of those,
For whom it's no time to be gay.

Denied of laughter and smiles for days,
They know not what it is to enjoy,
Can you not share something you have,
Can you not bring them a little joy?

When you can make someone else smile
When you can be someone's ally
That's when you can yourself be glad
That's when you'll have a HAPPY DIWALI!

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Hai Tyohar Khushi Ka
Phuljhadiyon ke ghere naacho Chagan-Magan.
Deep parv aaya khushiyon ka ghar-aangan.

Kheel bataashe barse tam ki maat huyi.
Ujiyaara aaya hai jagmag raat huyi.

Jhilmil Deepak baati hansati kiran-kiran.
Chale pataakhe kahin bhadaa-bhad galiyon mein.
Satrangein waale rang jharate hain ladiyon mein.
sapane muskaate nayanon ke darpan mein.

Hai tyohar khushi ka hilmil milein hum,
bhedbhaav ki ghrina na mann mein paalein hum.
Nav Parkash bhar dein Luxmi ke pujan mein.
Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Aayi Diwali khushi manayenge
Aayi Diwali khushi manaayenge,
miljul yah tyohaar manaayenge.

Chaudah saal kaata Banwaas,
Ram ji aaye bhakton ke paas,
khushiyon ke deep jalaayenge,
Aayi Diwali khushi manaayenge.

Dil se saare vair bhula kar,
ek-duje ko gale lagakar,
sab shikve door bhagaayenge,
Aayi Diwali khushi manaayenge.

Chal rahe hain bomb-pataakhe,
shor machaate dhoom-dharake,
sang "Tek" ke khushi manaaynge.
Aayi Diwali khushi manaayenge. 
Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Jagmag Karte Jyotideep
Aaj aa gayi fir se dekho,
raat amaavas ki kaali.
isko aalokit kar degi,
nav parkash se diwali.

Maloom hai tumko yah bachchon,
kyon diwali aati hai?
andhkaar ko door bhagaa kar,
nav parkash bhar jaati hai.

Ek baar Lankapati Ravan,
Sita ko har laaya tha.
Sarvnaash kar Ramchandar ne,
uska darp mitaya tha.

Varshon purv aaj ke din hi,
Ram Ayodhya aaye the.
unka swagat karne k hit,
sabne deep jalaaye the.

Jagmag karte jyotideep yah,
niti humein batlaate hain.
vijay satya ki hi hoti hai,
seekh humein sikhlaate hain. 
Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Pyari Deepawali Hai Aayi
Bachchon khushiyan khoob manaao
rang birange deep jalaao,
dene fir khush haali aai
pyari deepawali hai aayi.

Ghar-ghar deep jalaana hai
khoob mithaai khana hai.
pataakhe nahin bajaana hai.
paryavaran ko bachaana hai.

Mat karna bachchon manmaani
pataakhon se nahin chhedkhaani.,
sabhi ke cheharon par hai laali
"Jatan" sabhi ko subh Diwali. 
Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Diwali

The sweet smell of flowers
The array of colors
Diwali is here
Firecrackers are heard
Candles are lit
Children play
Presents are given
We pray to the gods
Diwali is here.

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Chudai Ka Asaan Safar

हैल्लो डियर और सभी रीडर्स में अमरीक में पंजाब का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 24 साल की है। दोस्तों ये मेरी फर्स्ट स्टोरी है, लेकिन मैने इस साईट पर पहले कई स्टोरियाँ पढ़ी है, वो मुझे बहुत अच्छी लगी, वो सभी स्टोरीस रियली बहुत हॉट थी।दोस्तों अब में अपनी स्टोरी पर आता हूँ, दोस्तों ये बात उस महीने की है जब में अपने काम के सिलसिले मे दिल्ली से आ रहा था।

मुझे होशियारपुर से चंडीगाड की बस पकड़नी थी लेकिन में थोड़ा लेट हो गया था। मैने लास्ट बस 9:30 की भागकर पकड़ी तो मुझे एक सीट मिल गई, बस अभी बाईपास पर पहुँची थी कि ड्राइवर ने ब्रेक लगा कर एक कपल को बस मे चड़ाया। अंकल की उम्र कोई 35-40 की होगी और आंटी की उम्र 30-35 होगी।अंकल को खड़े होने मे प्रॉब्लम हो रही थी, तभी मैने अपनी सीट ऑफर की और फिर अंकल बैठ गये और में पोल के साथ लगकर खड़ा हो गया, फिर आंटी ने मुझे थेक्स कहा और बस चल पड़ी वो एसी बस थी। कंडेक्टर ने टिकट दी और फिर लाइट बंद हो गई। सर्दी के दिन थे मेरे पास ओड़ने के लिए कुछ नहीं था, मेरे तो 12 बज गये, तभी पास खड़ी आंटी को लगा कि मुझे ठंड लग रही है, उन्होने अपना शॉल मेरे साथ शेयर करने की बात की मैने पहले तो थेंक्स कहा लेकिन उनके दुबारा कहने पर मैने ले लिया।

अब आंटी के बदन की गर्मी और शॉल की गर्मी से मुझे थोड़ा आराम मिला, तभी बस के फिर से ब्रेक लगे की आंटी को गिरने से मैने बचा लिया, लेकिन उन्हें बचाने में मेरे हाथ उनके बूब्स पर टच हो गया, लेकिन उन्होने कुछ नहीं कहा और संभाल कर मुझे थेंक्स कहा। अब वो बिल्कुल मेरे साथ लग गई जब भी ब्रेक लगते वो मुझे पकड़ लेती, ऐसा कई बार हुआ फिर मैने भी उन्हे जोर से पकड़ रखा था।फिर कुछ देर बाद मैने उनसे बात करनी शुरू की तो पता चला की वो शिमला के रहने वाले है और चंडीगाड जा रहे है।

फिर पाच मिनट चुप रहने के बाद आंटी ने मेरी तरफ़ फेस किया और उनकी मस्त चूची मेरे साथ लगने लगी, अब में गरम होने लगा था और आंटी की बातो का जबाब देता रहा, तभी मेरा लंड खड़ा हो गया था और आंटी के साथ बार बार टच हो रहा था।तभी आंटी ने एकदम से कुछ चुभ रहा है, कहकर मेरे लंड को पकड़ा, में तो डर गया तभी एक दम आंटी ने लंड को छोड़ दिया और फिर से फेस दूसरी और करकर खड़ी हो गई। फिर कुछ टाईम बाद मुझे महसूस हुआ कि आंटी धीरे धीरे पीछे को ही रही है और वो मेरे लंड पर अपनी गांड रगड़ रही है। तभी मैं समझ गया कि अब आंटी भी गरम हो गई है।

फिर में भी थोड़ा आगे हो गया आंटी की सलवार के बीच मे और फिर उनकी गांड की दरार मे मेरा लंड फंस गया।  लेकिन आंटी कुछ नहीं बोली अब मैने धीरे से अपना एक हाथ आंटी के बूब्स पर रख दिया और उन्हे दबाने लगा आंटी भी मस्त हो गई थी।फिर आंटी ने मेरी तरफ़ फेस कर के मुझे स्मूच की में थोड़ा हैरान रहे गया, अब क्या था फिर मैने उनके सूट मे हाथ डालकर उनकी ब्रा खोली और आगे से सूट उतार कर बूब्स चूसने लगा। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर आंटी ने मेरी ज़िप खोली और नीचे बैठकर मेरे लंड को मुहं मे लिया और जोर जोर से चूसने लगी, में तो सातवें आसमान मे था मुझे मज़ा इतना आ रहा था कि में आप सभी को बता नहीं सकता। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।फिर आंटी ने दस मिनट मे चूसकर मेरा सारा वीर्य पी लिया और फिर दुबारा से लंड खड़ा कर लिया और फिर से चूसने लगी वो ऐसे चूस रही थी जैसे की कोई एक्सपर्ट हो मेरा लंड फिर से पांच मिनट मे ही खड़ा हो गया था। अब आंटी ने अपनी सलवार को पीछे से नीचे किया और आगे को थोड़ा झुक गई अब मे समझ गया था कि अब वो क्या चाहती है। तभी मैने भी वक़्त खराब ना करते हुए अपना लंड उनकी चूत मे डाल दिया, उन्होने एक बार तो सिसकी ली लेकिन फिर चुप हो गई। दोस्तों क्या बताऊ क्या गरम ज्वालामुखी जैसी चूत थी और रुई की तरह नरम थी

।तभी में अपना लंड आगे पीछे करने लगा, मुझे मज़ा तो इतना आ रहा था कि बताना मुश्किल है। फिर 15 मिनट की चुदाई मे आंटी दो बार झड़ चुकी थी और फिर में भी झड़ने वाला था। तभी मैने आंटी के कान मे पूछा कि में वीर्य कहाँ छोड़ू तो आंटी ने अपनी तरफ से दो तीन स्ट्रोक मारे और में उनकी चूत मे ही झड़ गया। हम लोग इसे पॉज मे कम से कम पांच मिनट तक रहे उसके बाद आंटी थोड़ा सीधी हुई और मुझे स्मूच की पांच दस मिनट बाद बस एक ढाबे पर रुकी। फिर सभी पसेंजर उतर गये अंकल भी धीरे धीरे उतर गये थे।अब में और आंटी अकेले थे, बस मे फिर आंटी ने मुझे सीट पर लेटा दिया और अपनी सलवार नीचे करके मेरे तने हुए लंड पर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी।

तभी उन्होंने एकदम से अपनी स्पीड बड़ा दी।फिर करीब पांच मिनट बाद में और आंटी एक साथ झड़ गये, फिर आंटी उठी और मेरे लंड को मुंह मे लेकर चूसने लगी वो ऐसे सेक्स कर रही थी जैसे वो बरसों की भूखी हो, फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया। मैने आंटी को सीट पर लेटाकर उनकी दोनों टाँगे उठाकर अपना लंड उनकी चूत के अंदर एक जोर के धक्के के साथ डाल दिया, आंटी हाहाा इया ईईईईईई की आवाज़ निकालने लगी और बीच बीच मे कह रही थी कि प्लीज आज मुझे शांत कर दो मेरे राजा खुश रहो भगवान तुम्हे लम्बी उम्र दे, तुम्हारे लंड को खूब चूत मिले हहाईईइ ऐसी ही चोदते हुए मुझे दस मिनट हो गये थे और आंटी दो बार झड़ चुकी थी और शांत हो गई थी।

तभी मैने अपना लंड चूत से बाहर निकाला और एक सीट पर बैठ गया, आंटी भी ठीक होकर और सीट पर बैठ गई। फिर सभी पसेंजर बस के अंदर आ गये और सभी अपनी अपनी सीट पर बैठ गये, अंकल भी आ गये, बस फिर से चली और हम दोनो फिर से पास पास खड़े हो गये, अब दो मिनट बाद जब लाईट बंद हुई उसके बीस मिनट बाद जब सभी लोग शायद सोने की स्थति मे थे। तभी आंटी ने मेरे लंड पर अपना एक हाथ रखकर मेरे कान मे कहा कि तुमने मुझे तो शांत कर दिया अब मेरी बारी है।ऐसा कहकर वो फिर से झुकी और लंड को अपने मुहं मे लेकर जोर जोर से चूसने लगी।

जब लंड तन गया तो वो खड़ी हुई और सलवार को नीच करके मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर लगाकर बोली कि जोर से धक्का मारो और अपने दोनो हाथो से अपनी गांड को फैला लिया था और मेरे धक्का मारते ही मेरे लंड का मुहं अंदर चला गया और आंटी ने अपने दोनों हाथ छोड़ दिये और पीछे को प्रेशर बड़ाने लगी।

अब मेरा पूरा लंड अंदर चला गया में उसकी गांड मार रहा था और धीरे धीरे मज़ा ले रहा था बीस मिनट बाद में झड़ गया। लेकिन मैने लंड को अंदर ही रहने दिया और फिर कुछ समय बाद में फिर से गांड मारने लगा।फिर से 15 मिनट बाद झड़ गया आंटी आगे को हुई और मेरे लंड को पकड़ कर चूसने लगी उन्होने मेरे लंड को चूस कर बिल्कुल साफ कर दिया, लंड मे एक बूंद तक नहीं छोड़ी और फिर सीधी होकर कान मे बोली कि बेटा मुझे बहुत मजा आया।तभी मैने कहा कि हाँ जी तो फिर उन्होंने मेरे माथे को चूमा और कहा कि आज सात साल बाद किसी ने मुझे अच्छे से चोदा है, तेरे अंकल की और मेरी उम्र मे 10 साल का अन्तर है।

ये तो हमेशा बीमार रहते है और में अपनी भूख गाजर मूली से शांत करती हूँ। हम बस स्टेण्ड पहुँच गये मैने उनका सामान और अंकल को बड़े प्यार से उतारा अंकल ने मुझे थेंक्स कहा। में उनको शिमला के काउंटर पर छोड़ने गया तो आंटी ने अंकल को सामान के पास छोड़ कर कुछ खाने को लेने जाना है, यह कहकर वो मेरे साथ चल पड़ी फिर साईड मे जहाँ अंधेरा था, वहाँ पर जाकर हमने बहुत किस किये और वो जाते जाते मुझे 2000 रु. दे गई और कहा कि में तुम्हे दोबारा ज़रूर मिलूंगी ।।धन्यवाद

 

Oct,17 2014
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak

Pyar M Girls Banati Hai Boys Ko Ullu. Isqk M Girls Banati Hai Boys Ko Ullu, Boys Pakad K Ghumte H Babaji Ka Thullu.

Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
Winners

As a high school coach, I did all I could to help my boys win their games. I rooted as hard for victory as they did.

A dramatic incident, however, following a game in which I officiated as a referee, changed my perspective on victories and defeats. I was refereeing a league championship basketball game in New Rochelle, New York, between New Rochelle and Yonkers High.

New Rochelle was coached by Dan O'Brien, Yonkers by Les Beck. The gym was crowded to capacity, and the volume of noise made it impossible to hear. The game was well played and closely contested. Yonkers was leading by one point as I glanced at the clock and discovered there were but 30 seconds left to play.

Yonkers, in possession of the ball, passed off - shot - missed. New Rochelle recovered - pushed the ball up court - shot. The ball rolled tantalizingly around the rim and off. The fans shrieked.

New Rochelle, the home team, recovered the ball, and tapped it in for what looked like victory. The tumult was deafening. I glanced at the clock and saw that the game was over. I hadn't heard the final buzzer because of the noise. I checked with the other official, but he could not help me.

Still seeking help in this bedlam, I approached the timekeeper, a young man of 17 or so. He said, "Mr. Covino, the buzzer went off as the ball rolled off the rim, before the final tap-in was made."

I was in the unenviable position of having to tell Coach O'Brien the sad news. "Dan," I said, "time ran out before the final basket was tapped in. Yonkers won the game."

His face clouded over. The young timekeeper came up. He said, "I'm sorry, Dad. The time ran out before the final basket."

Suddenly, like the sun coming out from behind a cloud, Coach O'Brien's face lit up. He said, "That's okay, Joe. You did what you had to do. I'm proud of you."

Turning to me, he said, "Al, I want you to meet my son, Joe."

The two of them then walked off the court together, the coach's arm around his son's shoulder.

 

Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
CID vs RAJNIKANT
It all started with CID ...
then came RAJNIKANT ...
next was ALOKNATH ...
Ab bari hai
Arvind Kejriwal ki...
 
Kejriwal is so honest that no woman has ever asked him " do I look fat"
 
Kejriwal is so honest that when he throws a party , he calls the cops at 10pm
 
Kejriwal is so honest that he actually tests the level of salt in colgate
 
Kejriwal is so honest that he never skips youtube ads
 
Kejriwal is so honest that , he always removes USB safely
 
Kejriwal is so honest that , when he finds the bomb , he returns it to the terrorist
 
Kejriwal is so honest that , he got his wife's brother arrested for stealing his shoes during  his marriage ceremony
 
Kejriwal is so honest that , he cooks maggie only for 2 minutes
 
Kejriwal is so honest that , he actually " rolls on the floor laughing" when he texts ROFL
Hansimazak Hansimazak Hansimazak Hansimazak
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